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जोधपुर महाराजा मानसिंह जी की जब अंग्रजों से संधि हो गई थी, उस समय वे लगभग दस वर्ष तक ईश्वरीय साधना में लग गए थे और अपना अधिकांश समय वाणी-साहित्य के सृजन में लगाते थे। उन्होंने अपने दीवान से कह रखा था कि जो महत्वपूर्ण काम हो, तभी उनसे सम्पर्क किया जाए अन्यथा वे पागल पन का नाटक करके अपना साहित्य-सृजन करते थे। एकबार की बात है कि वे दरबार में इसी प्रकार का पागलपन का नाटक करके बैठे थे। उस समय कम्पनी के एजेंट जिनमे से एक का नाम सदरलैंड था। जब वह राज दरबार में आया तो महाराजा उनका स्वागत नहीं किया। एजेंट नाराज हुआ और उसने दीवान से इस बात की शिकायत की। दीवानजी ने महाराजा के अवसाद-ग्रीसित होने की बात कहीं और कहा कि आज कल उन्हें कुछ भी चीजों का पता नहीं रहता है। सदरलैंड इस बात के बाद क्या कह सकता था, मन मसोस कर चुप रह गया। पर संयोग से उसी दिन कुछ समय पश्चात एक चारण कवि भोपालदान सांदू राजदरबार में पधारे और महाराजा का शुभराज किया - नीम थम्भ के पाट नृप, छत कपाट के छज्ज। तिण देवालय धरम धज, धिनो "मान" कमधज्ज।। "दूसरे राजा जिस धर्म रूपी देवालय के नींव, स्तम्भ, कँगूरे, छत, कपाट, छज्जे हैं; उस देवालय का धर्म-ध्वज तो कमधज राजा मानसिंह स्वयं है।" ये दोहा सुनते ही महाराजा न केवल उसके आगमन पर अपने सिंहासन से खड़े हुए बल्कि वाह-वाह करते हुए चलकर कवि के सामने गए और उन्हें गले लगाकर दरबार में उसे सम्मान सहित उचित जगह पर बैठाया। एजेंट यह सब देख रहा था ये सब देखकर अंग्रेज क्रुद्ध हुए और महाराजा नाटकीय है और पागल होने का स्वांग कर रहे है कहने लगे। उसने दीवान से शिकायती लहजे में कहा कि- महाराजा मानसिंह जी के पास एजेंट की बात पहुंची और कहाकि ‘यह(चारण) वह कौम है, जिन्होंने हमारे कटे हुए मुण्डों को मुंह से बुलवाया है उनके आगमन पर मैं कैसे नहीं उठूं? मैं केवल अवसाद-ग्रसित ही तो हूँ। और फिर उन्होंने इतिहास प्रसिद्ध यह दोहा कहा- सांदू हूंफा सेवियौ, साहब दुरजणसल्ल। विड़दां माथौ बोलियौ, गीतां दूहां गल्ल।। अर्थात जब सांदू हूंफा(हूंफकरण) ने भाटी रावल दुरजणसाल का विरूद बखान किया, तब उनका मुंह गीत दोहे सुनकर वाह-वाह कर उठा था। महाराजा के कहने का तात्पर्य था कि जब इनके ओजस्वी विरूद से मरे हुए वीरों के मस्तक (मुंड) बोल सकते हैं तो इन चारण कवियों के आगमन पर मैं उठकर सामने क्यों नहीं जाऊं? संदर्भ-पुस्तक-राजस्थान की सांस्कृतिक कथाएँ। लेखक-डा आईदान सिंह भाटी। साभार -: कमल सिंह सुल्ताना Repost @_rajkul @official_rajputana_culture #rajkul #official_rajputana_culture #jaipur