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“कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और। हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर॥” ~ गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर , चरण स्पर्श ,शत शत नमन , अपने गुरु देव गुरु परम .. परम पूज्य बाबू जी 🙏 poet Kabir says , that individual is blinded if he doth ignore or show no belief in the guru ; for if the Lord be upset, then doth the Guru give solace , but when the Guru be upset then there be no comforting solace, no other path .. कबीरदास जी ने सत्य ही कहा है कि यदि परमात्मा रूठ जाए तो गुरु का आश्रय रहता है परंतु गुरु के उपरांत कोई ठौर नहीं रहता। गुरु के बिना ज्ञान नही - ज्ञान के बिना संस्कृति नही꫰ without the guru , there be no knowledge ; without knowledge there be no sacrament ; संस्कृति के बिना संस्कार नही - संस्कार के बिना आचरण नही꫰ without sacrament there be no culture ; without culture there be no conduct ; आचरण के बिना आदर नही -आदर के बिना मनुष्यता नही꫰ without conduct there be no respect ; without respect there be no humanness ; greetings on guru purnima .. my deference on the feet of my guru .. गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर सबको हार्दिक शुभकामनाएं !!! आज गुरु पूर्णिमा पर मेरे गुरु जी के चरणों में भी कोटि-कोटि नमन।🌹🌹🙏🏽